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प्रादेशिकीउत्तर-प्रदेश Alert Star Digital Team Jun 19, 2026 05:52 PM

Ram Mandir Donation Mystery: 16 करोड़ श्रद्धालु और सिर्फ 83 करोड़ का चढ़ावा! नृपेंद्र मिश्रा ने उठाए आंकड़ों पर सवाल, बोले- ‘5 रुपये औसत दान मानना मुश्किल’

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच के बीच अब श्रद्धालुओं की संख्या और दान राशि को लेकर भी बड़े सवाल उठने लगे हैं। श्री राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने स्वयं उन आंकड़ों पर संदेह जताया है

Ram Mandir Donation Mystery: 16 करोड़ श्रद्धालु और सिर्फ 83 करोड़ का चढ़ावा! नृपेंद्र मिश्रा ने उठाए आंकड़ों पर सवाल, बोले- ‘5 रुपये औसत दान मानना मुश्किल’

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच के बीच अब श्रद्धालुओं की संख्या और दान राशि को लेकर भी बड़े सवाल उठने लगे हैं। श्री राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने स्वयं उन आंकड़ों पर संदेह जताया है, जिनके अनुसार 11 महीनों में लगभग 16 करोड़ श्रद्धालु मंदिर पहुंचे, जबकि कुल चढ़ावा सिर्फ 83 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।

इन आंकड़ों को लेकर अब यह बहस तेज हो गई है कि क्या श्रद्धालुओं की संख्या सही है या फिर दान राशि के रिकॉर्ड में कहीं कोई गड़बड़ी हुई है।

16 करोड़ श्रद्धालु और सिर्फ 83 करोड़ रुपये का दान!

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार मार्च 2025 से फरवरी 2026 के बीच करीब 16 करोड़ श्रद्धालु रामलला के दर्शन के लिए अयोध्या पहुंचे। इसी अवधि में मंदिर को दान पेटियों के माध्यम से लगभग 83 करोड़ रुपये का चढ़ावा प्राप्त हुआ।

यदि इन दोनों आंकड़ों का औसत निकाला जाए तो प्रति श्रद्धालु दान की राशि करीब 5 रुपये बैठती है। यही गणित अब सवालों के घेरे में है, क्योंकि इतने बड़े धार्मिक केंद्र में आने वाले श्रद्धालुओं का औसतन केवल 5 रुपये का दान देना कई लोगों को असामान्य लग रहा है।

नृपेंद्र मिश्रा ने क्या कहा?

जब इस विरोधाभास को लेकर सवाल पूछा गया तो नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि सबसे पहले यह सत्यापित करना जरूरी है कि वास्तव में 16 करोड़ श्रद्धालु मंदिर आए थे या नहीं।

उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की संख्या का रिकॉर्ड प्रतिदिन तैयार होता है और प्रशासनिक स्तर पर भी इसकी जानकारी उपलब्ध रहती है। ऐसे में इन आंकड़ों की वास्तविकता की जांच करना मुश्किल नहीं है।

नृपेंद्र मिश्रा ने संकेत दिया कि उन्हें भी औसतन 5 रुपये प्रति श्रद्धालु का दान वाला आंकड़ा सहज नहीं लगता। उनके अनुसार, सामान्य तौर पर यह राशि कहीं अधिक होनी चाहिए।

‘50 या 100 रुपये औसत होना चाहिए’

नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि ट्रस्ट को स्पष्ट रूप से यह बताना चाहिए कि मार्च 2025 से मार्च 2026 के बीच कुल कितने श्रद्धालु मंदिर पहुंचे।

उन्होंने कहा कि उपलब्ध आंकड़ों को देखकर ऐसा लगता है कि प्रति श्रद्धालु औसत दान 50 या 100 रुपये के आसपास होना चाहिए। इसलिए 16 करोड़ श्रद्धालुओं और 83 करोड़ रुपये के चढ़ावे के बीच मौजूद अंतर को समझना और उसकी वास्तविकता जानना बेहद जरूरी है।

चढ़ावा गिनती प्रक्रिया पर भी उठे सवाल

राम मंदिर चढ़ावा मामले में चल रही जांच के दौरान नृपेंद्र मिश्रा ने यह भी स्वीकार किया कि दान की गिनती की व्यवस्था में गंभीर खामियां दिखाई दे रही हैं।

उन्होंने कहा कि सामने आ रहे तथ्यों से यह संकेत मिलता है कि पूरी प्रक्रिया में निगरानी लगभग न के बराबर थी। उनके मुताबिक बैंक और ट्रस्ट के बीच हुए समझौते में स्पष्ट रूप से तय था कि चढ़ावे की गिनती और उसका रिकॉर्ड रखने की जिम्मेदारी बैंक की होगी।

बैंक पर जिम्मेदारी निभाने में चूक का आरोप

नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि काउंटिंग प्रक्रिया के दौरान बैंक को अपने प्रतिनिधियों की मौजूदगी सुनिश्चित करनी चाहिए थी। यदि ऐसा नहीं हुआ तो यह जिम्मेदारी निभाने में चूक मानी जाएगी।

उन्होंने संकेत दिया कि गिनती कक्ष में पर्याप्त निगरानी व्यवस्था नहीं होने के कारण कई सवाल खड़े हो रहे हैं, जिनकी जांच जरूरी है।

एसआईटी जांच में सहयोग को तैयार

मामले की जांच कर रही एसआईटी को लेकर नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि यदि जांच एजेंसी उनसे किसी भी प्रकार की जानकारी या स्पष्टीकरण चाहती है तो वह पूरी तरह सहयोग करने के लिए तैयार हैं।

उन्होंने कहा कि उन्हें जो भी तथ्य और जानकारी उपलब्ध हैं, वे जांच एजेंसियों के सामने रखने में कोई हिचक नहीं करेंगे।

योगी आदित्यनाथ और चंपत राय से दूरी पर भी बोले

राम मंदिर चढ़ावा मामले में जांच शुरू होने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के साथ सार्वजनिक मंचों पर उनकी कम मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठे।

इस पर नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि यह मुख्यमंत्री के विवेकपूर्ण निर्णय का हिस्सा है। उनका मानना है कि जिन लोगों से जांच एजेंसियां पूछताछ कर सकती हैं या जिनके बयान दर्ज किए जा सकते हैं, उन्हें जांच के दौरान सत्ता प्रतिष्ठान के साथ सार्वजनिक रूप से नहीं दिखना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इससे जांच की निष्पक्षता को लेकर किसी भी प्रकार की शंका पैदा नहीं होती और आम जनता का भरोसा बना रहता है।

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