होम आजम खानः पहले तीन, अब सात साल सजा, 27 महीने जेल में भी रहे

प्रादेशिकीउत्तर-प्रदेश Alert Star Digital Team Oct 18, 2023 11:53 PM

आजम खानः पहले तीन, अब सात साल सजा, 27 महीने जेल में भी रहे

आजम खानः पहले तीन, अब सात साल सजा, 27 महीने जेल में भी रहे

आजम खानः पहले तीन, अब सात साल सजा, 27 महीने जेल में भी रहे

रामपुर ही नहीं पूरे यूपी में छह साल पहले तक आजम खान की तूती बोलती थी। उनकी भैंस भी गायब होती थी तो अधिकारी तक पैदल ही दौड़ लगा देते थे। यूपी में सरकार बदली तो उनका सबकुछ बदल गया।

एक के बाद एक 104 केस दर्ज हो गए। 27 महीनों तक जेल की सलाखों के पीछे गुजारना पड़ा। सुप्रीम कोर्ट से गुहार के बाद बाहर आए तो पहले तीन साल की सजा हुई अब सात साल के लिए जेल हो गई है। इस बार आजम के साथ ही उनकी पत्नी तंजीन और बेटे अब्दुल्ला को भी सजा सुना दी गई है। अब तीनों को एक साथ ही यह सजा भुगतनी होगी। अगर ऊपरी अदालत से राहत नहीं मिली तो यूपी की राजनीति में खासा रसूख रखने वाला परिवार राजनीति से पूरी तरह बाहर हो जाएगा। आजम और बेटे पर पहले ही सजा के कारण चुनाव लड़ने पर पाबंदी लग चुकी थी। इस बार पत्नी तंजीन भी सजायाफ्ता होकर चुनावी राजनीति से बाहर हो गई हैं।

आजम खान के साथ ही उनकी पत्नी तंजीन और बेटे अब्दुल्ला को फर्जी जन्म प्रमाण पत्र के मामले में बुधवार को रामपुर की अदालत ने सात-सात साल की सजा सुनाते हुए जेल भेज दिया। इससे पहले पीएम मोदी और रामपुर के तत्कालीन डीएम आन्जनेय कुमार सिंह के खिलाफ अमर्यादित बयानबाजी में आजम को तीन साल की सजा सुनाई जा चुकी है।

आजम खान पर रिकार्ड 104 मुकदमें दर्ज हैं। प्रशासन ने उन्हें भू-माफिया भी घोषित कर रखा है। उनके खिलाफ नदी, चकरोड, सरकारी जमीनों से लेकर किसानों की जमीनों पर भी अवैध तरीके से कब्जा करने के आरोप हैं। डकैती की साजिश रचने से लेकर शत्रु संपत्ति कब्जाने तक में आजम खां फंस चुके हैं।
सपा सरकार में यूपी के सबसे कद्दावर नेता माने जाने वाले मोहम्मद आजम खां योगी सरकार आने के बाद से मुसीबत में पड़ गए हैं। पूर्व विधायक स्वार एवं छोटे बेटे अब्दुल्ला आजम के डबल पैनकार्ड बनवाने में सहयोग का आरोप हो या फिर जौहर विश्वविद्यालय में करोड़ों का सेस बकाया का मामला। जौहर विवि के गेस्ट हाउस का प्रकरण हो या चकरोड कब्जाने का आरोप, एक के बाद एक उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज होते रहे। स्थिति यह है कि थानों से लेकर स्थानीय कोर्ट, हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक उनके मामले चल रहे हैं।

योगी सरकार आते ही बढ़ीं मुश्किलें
आजम की मुश्किलें योगी के सत्तासीन होते ही बढ़ने लगी थीं। सबसे पहले जौहर यूनिवर्सिटी में कस्टोडियन की जमीन का मामला प्रकाश में आया था। जिसमें शासन ने डीएम को जांच कराने का आदेश दिया था। तत्कालीन जिलाधिकारी शिवसहाय अवस्थी ने इसकी जांच कराई थी, जिसके बाद शासन को अपनी आख्या भेजी थी।

डीएम ने लिखा था कि जौहर यूनिवर्सिटी परिसर में कस्टोडियन की जमीन है, जिस पर यूनिवर्सिटी का कब्जा है। इसके बाद जल निगम में भर्तियों में गड़बड़ी, चकरोड की जमीनों पर अवैध कब्जे, सरकारी जमीन कब्जाने के आरोप लगे। तमाम मामलों में एसआईटी गठित की गई और जांच हुई तो आरोप सही साबित पाए गए।

लोस चुनाव में हर दिन हुए मुकदमे, लगा प्रतिबंध
लोकसभा चुनाव के दौरान आजम खां ने हर दिन विवादित बयान दिया। प्रशासन से लेकर शासन तक निशाना साधा। अमर्यादित बयानबाजी के लिए उनके खिलाफ कमोबेश हर दिन मुकदमे होते रहे। भड़काऊ भाषण में ही कुल 14 मुकदमें हुए, जिनमें चार्जशीट लगाई गई। इनमें सबसे ज्यादा सुर्खियों में पूर्व सांसद जयाप्रदा और तत्कालीन डीएम आन्जनेय कुमार सिंह पर विवादित बयान रहा। आयोग को आजम खां की सभाओं पर रोक लगाना प़ड़ा था।

जमीनों पर कब्जे के सर्वाधिक मुकदमे
आजम खां पर सबसे अधिक मुकदमे किसानों की जमीनें कब्जाने के आरोप में दर्ज हुए। अजीमनगर थाने में उनके खिलाफ 29 मामले दर्ज किए गए। जबकि, शत्रु संपत्ति कब्जाने, सरकारी पेड़ कटवाने, नदी की रेतीली जमीन कब्जाने के आरोप में भी मुकदमें दर्ज किए गए। इसके साथ ही यतीमखाना प्रकरण में आजम पर 11 मुकदमें दर्ज हुए हैं। इन सभी में उन पर डकैती डलवाने, भैंस, गाय, बछड़ा, बकरियां जबरन खुलवाने के आरोप लगे हैं।

बेटे के पासपोर्ट, जन्म प्रमाण पत्र में धोखाधड़ी करने से लेकर पर पड़ोसी को धमकाने, घर पर कब्जा करने की नीयत मारपीट कराने तक के आरोप लगे हैं। सपा नेता आजम खां पर जमीनों पर अवैध रूप से कब्जों के एक के बाद एक मामले दर्ज होने के बाद सरकार के एंटी भू-माफिया पोर्टल पर उनका नाम दर्ज किया जा चुका है।

प्रशासन उन्हें भू-माफिया घोषित कर चुका है। आजम ही नहीं उनकी पत्नी और बेचे अब्दुल्ला पर भी कई मामले दर्ज हैं। बिजली चोरी से लेकर सरकारी जमीन कब्जाने तक के आरोप में पत्नी तजीन फात्मा एवं स्वार से विधायक रहे उनके छोटे बेटे अब्दुल्ला के खिलाफ भी कई मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। कई मामलों में पुलिस उन्हें चार्जशीट कर चुकी है।

आजम और उनके परिवार पर दर्ज चर्चित मामले
-14 मुकदमे चुनाव के दौरान भड़काऊ बयानबाजी के दर्ज।
-1 सेना पर विवादित बयान देने में सिविल लाइंस में मुकदमा दर्ज।
-2 मुकदमे चुनाव जीतने के बाद जयाप्रदा पर अमर्यादित बयानबाजी के आरोप में दर्ज।
-29 मुकदमे अजीमनगर थाने में दर्ज, जौहर विवि के लिए किसानों की जमीन कब्जाने का आरोप।
-1 मुकदमा कस्टोडियन की जमीन कब्जाने के आरोप दर्ज।
-2 मुकदमा कोसी की सरकारी जमीन कब्जाने, पेड़ काटने का दर्ज।
-11 मुकदमे यतीमखाना प्रकरण को लेकर दर्ज, भैंस से लेकर बकरी खुलवाने तक का आरोप।
-4 मामले चकरोडों पर अवैध रूप से कब्जा करने के दर्ज, भू माफिया घोषित।
-2 मुकदमे मारपीट, धमकाने, अवैध कब्जे के प्रयास में दर्ज, वारंट हो चुके हैं।
-4 मुकदमे गंज और कोतवाली में धमकाने के आरोप में दर्ज।

कौन हैं आजम को सजा दिलाने वाले आकाश सक्सेना
आकाश सक्सेना पेशे से बिजनेसमैन और पूर्व मंत्री शिव बहादुर सक्सेना के बेटे हैं। वह कॉलेज टाइम से ही राजनीति में सक्रिय हैं। बीजेपी ने उन्हें पश्चिमी यूपी के लघु उद्योग का संयोजक भी बनाया था। उन्होंने ही आजम खान के खिलाफ मामला दर्ज करवाया था। इसके चलते आजम की सदस्यता को खत्म कर दिया गया। इससे पहले आकाश ने आजम के बेटे अब्दुला आजम की फर्जी डिग्री का मामला उठाया था जिसके चलते अब्दुला की भी सदस्यता समाप्त कर दी गयी थी। आजम और उनके परिवार के खिलाफ दर्ज 43 मुकदमों में आकाश सक्सेना पक्षकार हैं।

इमरजेंसी के विरोध से राजनीति, रामपुर से दस बार विधायक रहे आजम
आजम खान रामपुर विधानसभा सीट से 10 बार विधायक और कई बार मंत्री बने। लोकसभा के सांसद भी बने थे। कांग्रेस राज में आपातकाल के विरोध में तमाम छोटे-बड़े नेताओं में आजम खान भी जेल में रहे। आजम खान के रामपुर की राजनीति की कहानी 1974 से शुरू होती है, जब वे अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्र संघ के महासचिव चुने गए थे। उसी समय आपातकाल लगा और उनके कांग्रेस विरोधी रवैये के कारण उन्हें भी जेल भेज दिया गया।

आपातकाल के बाद जेल से छूटने पर आजम खान का कद तो बढ़ गया लेकिन माली हालत खस्ता ही रही। उनके पिता मुमताज खान शहर में एक छोटा-सा टाइपिंग सेंटर चलाते थे। आज़म जेल से आते ही विधानसभा का चुनाव लड़ गए, लेकिन संसाधनों की कमी के कारण कांग्रेस के मंज़ूर अली खान से हार गए।

रामपुर के नवाब से टकराए
इसके बाद शुरू हुआ रामपुर के नवाब खानदान से टकराने का दौर। रामपुर के नवाब यूसुफ अली 1857 की क्रांति में अंग्रेजों के साथ थे, लेकिन उनकी बाद की पीढ़ी बदलते दौर में राजनीति में आ गई और उन्हें 1967 में कांग्रेस के टिकट पर उन्हीं के वारिस मिकी मियां के नाम से चर्चित जुल्फिकार अली खान सांसद बने।

तमाम रजवाड़ों की तरह रामपुर का नवाबी खानदान राजनीति में आते ही अपनी पुरानी धाक जमाने में सफल रहा। मिकी मियां तो 1967, 1971, 1980, 1984 और 1989 में सांसद बने ही, उनकी मौत के बाद 1996 और 1999 में उनकी पत्नी बेगम नूर बानो भी सांसद चुनी गईं।

नवाबी खानदान की राजनीति को चुनौती देने वाले आजम खान ही थे। आजम निचले तबके और मजदूरों में अपनी पैठ बनाते जा रहे थे। उनकी लोकप्रियता बढ़ती जा रही थी और रामपुर लोकसभा में जहां मिकी मियां सफलता हासिल कर रहे थे, वहीं विधानसभा चुनावों में आजम भी जीतने लगे थे।

आजम जैसे-जैसे ताकतवर होते गए, वैसे-वैसे रामपुर के नवाब खानदान की राजनीति पस्त होती गई। इस इलाके में सपा का असर बढ़ता चला गया। 2004 में तो सपा ने मुंबइया फिल्मों की हीरोइन जया प्रदा को यहां चुनाव में खड़ा किया और वे चुनाव जीत गईं। बाद में आजम भी सपा में आए और पहले मुलायम फिर अखिलेश यादव के सबसे करीबी हो गए।

Alert Star Digital Team

Alert Star Digital Team

एलर्ट स्टार नाम की पत्रिका और फिर समाचार-पत्र का जन्म हुआ। हमारा प्रयास कि हम निष्पक्ष और निडर पत्रकारिता का वह स्वरूप अपने पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करे। जो लोगो के मन मस्तिष्क में एक भरोसे के रूप में काबिज हो।

Leave A comment

महत्वपूर्ण सूचना -

भारत सरकार की नई आईटी पॉलिसी के तहत किसी भी विषय/ व्यक्ति विशेष, समुदाय, धर्म तथा देश के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी दंडनीय अपराध है। इस प्रकार की टिप्पणी पर कानूनी कार्रवाई (सजा या अर्थदंड अथवा दोनों) का प्रावधान है। अत: इस फोरम में भेजे गए किसी भी टिप्पणी की जिम्मेदारी पूर्णत: लेखक की होगी।

Recent Updates

Most Popular

(Last 14 days)