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समाचारदेशअपराध Alert Star Digital Team Mar 31, 2026 09:48 PM

100 करोड़ के फर्जी ITC घोटाले पर ED का बड़ा प्रहार, कई कंपनियों का काला खेल बेनकाब

फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 14.85 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अटैच किया है। यह कार्रवाई सोमवार (30 मार्च, 2026) को मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत की गई।

100 करोड़ के फर्जी ITC घोटाले पर ED का बड़ा प्रहार, कई कंपनियों का काला खेल बेनकाब

फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 14.85 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अटैच किया है। यह कार्रवाई सोमवार (30 मार्च, 2026) को मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत की गई। जांच एजेंसी ने इस मामले में 15 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल कर दी है, जिससे घोटाले की गंभीरता और नेटवर्क का दायरा सामने आया है।

शेयर होल्डिंग और अचल संपत्तियां जब्त

ED के अनुसार, अटैच की गई संपत्तियों में शेयर होल्डिंग के साथ-साथ कई अचल संपत्तियां शामिल हैं। ये संपत्तियां पश्चिम बंगाल के हावड़ा और हुगली जिलों तथा गुवाहाटी में स्थित बताई गई हैं। जांच में पाया गया कि M/s Ganesh International के पार्टनर की लगभग 11.88 करोड़ रुपये की शेयर होल्डिंग भी जब्त की गई है, जिसे घोटाले से जुड़ी आय माना गया है।

कई राज्यों में छापेमारी से मिले अहम सबूत

इस मामले की जांच एक FIR के आधार पर शुरू हुई थी, जिसमें IPC की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया था। इसके बाद ED ने 20 जनवरी, 2026 को अरुणाचल प्रदेश, कोलकाता, झारखंड और मणिपुर में कुल 10 ठिकानों पर छापेमारी की। छापों के दौरान एजेंसी को कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल सबूत मिले, जिन्होंने पूरे फर्जी नेटवर्क का खुलासा किया।

जांच में सामने आई फर्जी कंपनियों की साजिश

जांच के दौरान खुलासा हुआ कि M/s Siddhi Vinayak Trade Merchant नाम की कंपनी वास्तव में एक फर्जी संस्था थी। इस कंपनी ने बिना किसी वास्तविक व्यापार के लगभग 99.31 करोड़ रुपये का फर्जी ITC तैयार किया। इसके लिए नकली बिल और ई-वे बिल का इस्तेमाल किया गया था।

ED की जांच में यह भी सामने आया कि घोटाले को अंजाम देने के लिए कई कागजी कंपनियों का नेटवर्क बनाया गया था। इनमें M/s AC Enterprise, M/s Riya Rishita Enterprise, M/s Prince Enterprise, M/s P Enterprise और M/s Rangoli Enterprise जैसी कंपनियां शामिल थीं। जांच में पाया गया कि इन कंपनियों का वास्तविक रूप से कोई कार्यालय या कारोबारी गतिविधि मौजूद नहीं थी।

फर्जी ITC ट्रांसफर कर छिपाया गया असली स्रोत

इन शेल कंपनियों के जरिए फर्जी ITC को अलग-अलग संस्थाओं में ट्रांसफर किया गया ताकि पैसों के असली स्रोत को छिपाया जा सके। कई मामलों में संबंधित कंपनियों ने खुद स्वीकार किया कि उनके द्वारा कोई वास्तविक व्यापारिक लेन-देन नहीं किया गया था।

जांच में यह भी सामने आया कि Ganesh Infraworld Limited (पूर्व में Ganesh International), Phoenix Hydraulics, Fama Marketing और Anjani Impex जैसी कंपनियों ने इस फर्जी ITC का लाभ उठाया। इन संस्थाओं ने करीब 14.85 करोड़ रुपये के फर्जी ITC का उपयोग कर अपनी GST देनदारी का भुगतान किया।

फर्जी बिलों के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग का खेल

ED के मुताबिक, पूरे मामले में फर्जी बिलों और कागजी कंपनियों के माध्यम से काले धन को सफेद करने का काम किया गया। बिना वास्तविक कारोबार के भारी टर्नओवर दिखाकर टैक्स लाभ लिया गया और मनी लॉन्ड्रिंग को अंजाम दिया गया। फिलहाल प्रवर्तन निदेशालय इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रहा है और आगे और खुलासों की संभावना जताई जा रही है।

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