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विचारसेहत Alert Star Digital Team Jun 16, 2026 03:56 PM

Cough Syrup New Rules: अब कफ सिरप पर सरकार की सख्ती, दशकों पुरानी छूट खत्म; दवा कंपनियों को मानने होंगे नए नियम

भारत में बच्चों से लेकर बड़ों तक खांसी, जुकाम और बुखार जैसी सामान्य बीमारियों के इलाज में सिरप और अन्य लिक्विड दवाओं का व्यापक उपयोग होता है। इन्हें आसानी से सेवन किया जा सकता है, इसलिए अधिकांश घरों में ये दवाएं उपलब्ध रहती हैं।

Cough Syrup New Rules: अब कफ सिरप पर सरकार की सख्ती, दशकों पुरानी छूट खत्म; दवा कंपनियों को मानने होंगे नए नियम

भारत में बच्चों से लेकर बड़ों तक खांसी, जुकाम और बुखार जैसी सामान्य बीमारियों के इलाज में सिरप और अन्य लिक्विड दवाओं का व्यापक उपयोग होता है। इन्हें आसानी से सेवन किया जा सकता है, इसलिए अधिकांश घरों में ये दवाएं उपलब्ध रहती हैं। इसी बीच केंद्र सरकार ने मरीजों की सुरक्षा को और मजबूत बनाने तथा मिलावटी दवाओं पर अंकुश लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 9 जून 2026 को जारी अधिसूचना के माध्यम से कफ सिरप और अन्य लिक्विड दवाओं को मिलने वाली वर्षों पुरानी नियामकीय छूट समाप्त कर दी है। इस फैसले के बाद दवा निर्माण करने वाली कंपनियों को पहले की तुलना में अधिक कड़े मानकों और प्रक्रियाओं का पालन करना होगा।

ड्रग्स रूल्स में क्या बदलाव किया गया?

केंद्र सरकार ने ड्रग्स रूल्स, 1945 में पांचवां संशोधन लागू किया है। इस संशोधन के तहत Schedule K में शामिल दवाओं की सूची से "सिरप" शब्द को हटा दिया गया है। इसका सीधा अर्थ यह है कि अब सिरप बनाने वाली कंपनियां पहले की तरह विशेष छूट का लाभ नहीं उठा सकेंगी।

नए नियमों के अनुसार कफ सिरप और अन्य लिक्विड दवाओं को बाजार में उतारने से पहले सख्त गुणवत्ता परीक्षण और नियामकीय प्रक्रियाओं से गुजरना होगा। अब इन दवाओं पर भी वही मानक लागू होंगे, जो टैबलेट, कैप्सूल और इंजेक्शन जैसी दवाओं पर लागू किए जाते हैं।

Schedule K क्या था और कंपनियों को इससे क्या लाभ मिलता था?

Schedule K भारतीय दवा कानून की एक विशेष सूची थी, जिसमें शामिल दवाओं को कुछ नियामकीय प्रावधानों से छूट प्राप्त थी। सिरप भी इसी सूची का हिस्सा था।

इस छूट के कारण सिरप निर्माताओं को कुछ लाइसेंसिंग प्रक्रियाओं में राहत मिलती थी। साथ ही लेबलिंग और पैकेजिंग संबंधी कुछ नियम भी अपेक्षाकृत आसान थे। इसका लाभ उठाकर कई छोटी और गैर-मानक कंपनियां भी बाजार में सिरप बेच रही थीं, जिनकी गुणवत्ता जांच उतनी कठोर नहीं होती थी।

अब Schedule K से सिरप को बाहर किए जाने के बाद यह विशेष दर्जा पूरी तरह समाप्त हो गया है और सभी कंपनियों को समान मानकों का पालन करना होगा।

सरकार को यह सख्त कदम क्यों उठाना पड़ा?

सरकार के इस फैसले के पीछे पिछले कुछ वर्षों में सामने आई गंभीर घटनाएं प्रमुख कारण मानी जा रही हैं। वर्ष 2022 और 2023 के दौरान गाम्बिया और उज्बेकिस्तान में कई बच्चों की मौत के मामलों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी थी।

जांच के दौरान कथित तौर पर यह सामने आया कि भारत की कंपनियों Marion Biotech और Maiden Pharmaceuticals द्वारा निर्मित कुछ कफ सिरप इन घटनाओं से जुड़े थे। रिपोर्ट्स में इन सिरप में जहरीले रसायनों की मौजूदगी की बात कही गई थी।

इन घटनाओं के बाद स्वास्थ्य मंत्रालय और ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने दवा निर्माण कंपनियों की निगरानी बढ़ा दी। सरकार ने यह सुनिश्चित करने का निर्णय लिया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। Schedule K में किया गया यह संशोधन उसी दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

मरीजों और आम लोगों को क्या मिलेगा फायदा?

नए नियमों का सबसे बड़ा लाभ मरीजों और उपभोक्ताओं को मिलने की उम्मीद है। सख्त गुणवत्ता मानकों के कारण बाजार में घटिया और मिलावटी कफ सिरप की उपलब्धता कम होगी।

हर सिरप को अनिवार्य रूप से गुणवत्ता जांच और सुरक्षा परीक्षणों से गुजरना होगा, जिससे स्वास्थ्य जोखिमों में कमी आएगी। इसके अलावा दवाओं की पैकेजिंग और लेबलिंग में अधिक स्पष्ट जानकारी उपलब्ध होगी, जिससे उपभोक्ताओं को एक्सपायरी डेट, उपयोग और संभावित साइड इफेक्ट्स को समझने में आसानी होगी।

फार्मा कंपनियों पर क्या होगा असर?

इस फैसले का सीधा प्रभाव दवा निर्माण उद्योग पर पड़ेगा। अब कंपनियों को सिरप और अन्य लिक्विड दवाओं के निर्माण, पैकेजिंग और विपणन के दौरान अतिरिक्त नियमों और गुणवत्ता मानकों का पालन करना होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे दवा उद्योग में पारदर्शिता बढ़ेगी, मिलावटी उत्पादों पर रोक लगेगी और मरीजों तक अधिक सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण दवाएं पहुंच सकेंगी।

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