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समाचारराजनीतिप्रादेशिकीउत्तर-प्रदेश Alert Star Digital Team Oct 23, 2025 04:59 PM

BSP Mission-2027: मायावती ने किया बड़ा संगठनात्मक फेरबदल, पश्चिमी यूपी के कई दिग्गज नेताओं को हटाया गया

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों को लेकर पार्टी में बड़ा फेरबदल किया है. राजधानी लखनऊ में हाल ही में हुई महारैली के बाद बसपा की राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं.

BSP Mission-2027: मायावती ने किया बड़ा संगठनात्मक फेरबदल, पश्चिमी यूपी के कई दिग्गज नेताओं को हटाया गया

BSP Mission-2027: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों को लेकर पार्टी में बड़ा फेरबदल किया है. राजधानी लखनऊ में हाल ही में हुई महारैली के बाद बसपा की राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. अब पार्टी ने मिशन-2027 के तहत संगठन को मजबूत करने और नए चेहरों को जिम्मेदारी देने की दिशा में अहम कदम उठाया है.

मेरठ-सहारनपुर और मुरादाबाद मंडल में बड़ा बदलाव

बसपा ने मेरठ-सहारनपुर और मुरादाबाद मंडल के निवर्तमान मुख्य प्रभारी पूर्व राज्यसभा सांसद मुनकाद अली और पूर्व सांसद गिरीश चंद जाटव को उनके पदों से मुक्त कर दिया है.
अब उनकी जगह पर आगरा के विक्रम सिंह जाटव और अमरोहा के जाफर मलिक को नया प्रभारी बनाया गया है.

इसके अलावा पश्चिम क्षेत्र के पूर्व मुख्य प्रभारी शमसुद्दीन राइन को बरेली मंडल का मुख्य प्रभारी नियुक्त किया गया है. मायावती ने नए प्रभारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे स्थानीय कार्यकर्ताओं को सक्रिय करें और बहुजन समाज के मतदाताओं को एकजुट रखने पर ध्यान दें.

मिशन-2027 के तहत ‘बहुजन मिशन अभियान’

बसपा ने आगामी चुनाव को ध्यान में रखते हुए ‘बहुजन मिशन 2027’ नाम से एक नया अभियान शुरू किया है. इस अभियान के ज़रिए पार्टी गांव-गांव तक अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटी है.
मायावती ने कार्यकर्ताओं से कहा है कि वे विपक्षी दलों के दुष्प्रचार का मजबूती से जवाब दें और दलित, ओबीसी, एससी-एसटी और मुस्लिम समुदायों को एकजुट करने का काम करें.

युवा मतदाताओं तक पहुंच बढ़ाने के लिए आकाश आनंद को डिजिटल कैंपेन और यूथ कनेक्ट की जिम्मेदारी सौंपी गई है.

बसपा का गिरता वोट शेयर बना चुनौती

2022 के विधानसभा चुनावों में बसपा का वोट शेयर घटकर 12.88% रह गया था, जबकि 2024 लोकसभा चुनावों में यह और गिरकर 9.39% तक पहुंच गया. बसपा को उस चुनाव में एक भी सीट नहीं मिली थी, जिसके बाद मायावती ने गठबंधन राजनीति पर नाराजगी जाहिर की थी. उन्होंने कहा था कि “हमारे वोट तो दूसरों को ट्रांसफर हो जाते हैं, लेकिन हमें उनका वोट नहीं मिलता.”

मायावती की रणनीति साफ

बसपा सुप्रीमो का यह फेरबदल इस बात का संकेत है कि पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले नई रणनीति और नेतृत्व ढांचे के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है.
मायावती अब पार्टी संगठन को जमीनी स्तर पर दोबारा खड़ा करने और पारंपरिक वोट बैंक को एकजुट करने पर फोकस कर रही हैं.

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