होम मीटिंग में त्याग-बलिदान की बातें, लेकिन पीसी में चुप्पी. महाराष्ट्र एनडीए में सीट शेयरिंग कहां अटका?

समाचारदेश Alert Star Digital Team Oct 16, 2024 09:49 PM

मीटिंग में त्याग-बलिदान की बातें, लेकिन पीसी में चुप्पी. महाराष्ट्र एनडीए में सीट शेयरिंग कहां अटका?

मीटिंग में त्याग-बलिदान की बातें, लेकिन पीसी में चुप्पी. महाराष्ट्र एनडीए में सीट शेयरिंग कहां अटका?

मीटिंग में त्याग-बलिदान की बातें, लेकिन पीसी में चुप्पी. महाराष्ट्र एनडीए में सीट शेयरिंग कहां अटका?

महाराष्ट्र में चुनाव की घोषणा के ठीक 24 घंटे बाद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे अपने दोनों डिप्टी सीएम (देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार) के साथ मीडिया में आए. तीनों नेताओं की प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले यह अटकलें तेज हो गईं कि महाराष्ट्र में एनडीए सीट बंटवारे की घोषणा कर सकती है, लेकिन जब तीनों ने बोलना शुरू किया तो मुद्दा कुछ और ही था.

 

मुंबई में महायुति की प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिंदे, फडणवीस और अजित ने एनडीए सरकार की उपलब्धियां गिनाईं. तीनों ने अपने-अपने काम के खूब कसीदे पढ़े, लेकिन जब सवाल सीट शेयरिंग को लेकर पूछा गया तो शिंदे, फडणवीस और पवार चुप्पी साध गए.

ऐसे में महाराष्ट्र के सियासी गलियारों में सवाल उठ रहा है कि चुनाव की घोषणा के बावजूद एनडीए में सीट शेयरिंग पर अब तक फैसला क्यों नहीं हो पाया है?

झारखंड NDA में सीट शेयरिंग फाइनल

महाराष्ट्र के साथ-साथ झारखंड में भी विधानसभा के चुनाव होने हैं. यहां पर एनडीए ने सीट शेयरिंग फाइनल कर लिया है. बीजेपी के चुनाव सह-प्रभारी हिमंता बिस्वा सरमा ने पत्रकारों को बताया कि एनडीए में शामिल आजसू को 11 और जेडीयू को 2 सीटें देने का प्रस्ताव है.

झारखंड में विधानसभा की कुल 81 सीटें हैं. सरमा के मुताबिक बातचीत होने पर कुछ सीटें चिराग पासवान की पार्टी लोजपा (आर) को भी दी जा सकती है.

महाराष्ट्र में क्यों फंसा है पेंच, 3 कारण

1. भारतीय जनता पार्टी महाराष्ट्र की 288 में से कम से कम 150-160 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है. ऐसे में विधानसभा की सिर्फ 130 सीटें ही बच पा रही है. एकनाथ शिंदे और अजित पवार की दावेदारी इससे ज्यादा सीटों की है. साथ ही 3 और छोटी पार्टियां एनडीए गठबंधन में है.

अजित पवार कम से कम 70 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहते हैं. एकनाथ शिंदे की ख्वाहिश 90 सीटों पर लड़ने की है. रामदाल अठावले और स्वाभिमान पक्ष जैसी 3 अन्य छोटी पार्टियों की दावेदारी 30 सीटों पर है. इन सभी का कुल जोड़ 190 के करीब पहुंचता है. ऐसे में बीजेपी के पास लड़ने के लिए करीब 100 सीटें बच रही हैं.

2. कौन किस सीट पर चुनाव लड़ेगा, इस पर भी पेंच है. शिवसेना (शिंदे) कोकण, ठाणे और मुंबई पर ज्यादा मजबूती से दावेदारी कर रही है. शिवसेना की दावेदारी पश्चिमी महाराष्ट्र पर भी है, जहां एनसीपी (अजित) का दबदबा रहा है.

वहीं अजित पवार की दावेदारी मुंबई की करीब एक दर्ज सीटों पर है. मुंबई में बीजेपी और शिंदे के बीच पहले से रस्साकसी चल रही है. सीट शेयरिंग की बात न सुलझने की एक यह भी वजह है.

3. बीजेपी की कोशिश है कि गठबंधन के सहयोगियों के लिए सिर्फ उन्हीं सीटों को छोड़ा जाए, जहां पर उनके जिताऊ उम्मीदवार हैं. अजित पवार की पार्टी में अभी भगदड़ मची हुई है. नेता पार्टी छोड़ कर जा रहे हैं. ऐसे में उसे ज्यादा सीट देना कितना फायदेमंद रहेगा, इसकी भी जांच परख बीजेपी ठीक से कर लेना चाहती है.

अमित शाह का एक बयान भी चर्चा में

महाराष्ट्र की सियासत में अमित शाह का एक बयान इन दिनों सुर्खियों में है. एक बैठक में शाह ने एकनाथ शिंदे से कहा कि एक वक्त हमारे लोगों ने आपके लिए बलिदान दिया. हम नंबर में ज्यादा थे फिर भी आप मुख्यमंत्री बने. अब त्याग करने की बारी आपकी है.

शाह के इस बयान के सियासी मायने तलाशे जा रहे हैं. कहा जा रहा है कि बीजेपी मुंबई में ज्यादा सीटें चाह रही है. वहीं शिंदे गुट से अब सीएम पद की दावेदारी भी बीजेपी नहीं चाह रही है.

शिंदे गुट बड़े-बड़े बैनर के जरिए यह बताने की कवायद में जुटा है कि फिर सरकार में आएंगे तो पहले की तरह ही काम चलता रहेगा.

22 से नामांकन, 20 नवंबर को चुनाव

महाराष्ट्र में 22 अक्टूबर से नामांकन प्रक्रिया शुरू हो जाएगी. 29 अक्टूबर तक प्रत्याशी अपना नामांकन दाखिल कर सकेंगे. राज्य में एक चरण में ही सभी 288 सीटों पर मतदान कराए जाएंगे. 20 नवंबर को मतदान की तारीख घोषित की गई है.

23 नवंबर को विधानसभा के नतीजे आएंगे. महाराष्ट्र में 26 नवंबर तक सरकार नहीं बन पाती है तो राष्ट्रपति शासन की घोषणा हो सकती है. दरअसल, राज्य में विधानसभा का कार्यकाल 26 नवंबर तक ही है.

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