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नोटबंदी के बाद सबसे कम कीमतों पर बिक रहे नागपुरी संतरे
नागपुरः नागपुर के प्रसिद्ध संतरा उगाने वाले किसानों को इस साल भारी मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है।
कारण यह है कि नोटबंदी के बाद ऐसा पहला मौका है जब उन्हें सबसे कम कीमतों पर अपने संतरे बेचने पड़ रहे हैं। हालत यह है कि उन्हें छह से चौदह रुपए किलो की दर से व्यापारियों को अपने संतरे बेचने पड़ रहे हैं। यही वजह है कि इन दिनों उन्हें अपनी फसल की लागत तक निकालनी मुश्किल हो रही है।
बता दें कि महाराष्ट्र में विदर्भ के नागपुर, अमरावती और वर्धा जिलों में हर साल बड़े पैमाने पर संतरों का उत्पादन किया जाता है। इस इलाके के संतरों को नागपुरी संतरों के नाम से जाना जाता है। यहां के संतरों की देश और दुनिया में खासी मांग होती है। इस लिहाज से नागपुर की मंडी समिति एशिया की सबसे बड़ी मंडी समिति मानी जाती है। यहां से बड़ी मात्रा में हर साल नागपुर के संतरे अलग-अलग राज्यों में भेजे जाते हैं। वहीं, संतरों के मामले में नागपुर शहर के अलावा वरुड, परतवाड़ा, काटोल और नरखेड़ी की बाजार प्रमुख हैं।
छह से लेकर अधिकतम चौदह रुपए किलो के हिसाब से संतरे खरीदे जा रहे हैं
फिलहाल नागपुर और आसपास के इलाकों में किसानों से छह से लेकर अधिकतम चौदह रुपए किलो के हिसाब से संतरे खरीदे जा रहे हैं। संतरा व्यापारी राजेश ऑटोणे बताते हैं कि ऐसे किसानों की संख्या कम ही है जिन्हें चौदह रुपए किलो के हिसाब से संतरे का भाव मिल रहा है। जबकि, इस साल के मुकाबले पिछले साल किसानों को संतरे के दो से तीन गुना अधिक दाम मिले थे।
पिछले साल किसानों से बीस से तीस रुपए किलो की दर से संतरे खरीदे गए थे। वे बताते हैं कि नोटबंदी के दौरान भी ऐसे ही हालात बने थे। उस समय भी किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ा था और उस नुकसान से उभरने में उन्हें कुछ साल लग गए थे। ऐसे में इस साल फिर से उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है। जाहिर है कि इस साल हुए नुकसान से उभरने में यहां के संतरा उत्पादक किसानों को लंबा समय लगेगा।
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