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समाचारदेश Alert Star Digital Team Nov 16, 2020 09:33 PM

सशस्त्र बलों में तैनाती के मामले में कोर्ट को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए: SC

सशस्त्र बलों में तैनाती के मामले में कोर्ट को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए: SC

सशस्त्र बलों में तैनाती के मामले में कोर्ट को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए: SC

 सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सोमवार को कहा कि उसे तैनाती (विशेषकर सशस्त्र बलों में) के मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए क्योंकि किसी न किसी व्यक्ति को तो लद्दाख (Ladakh), पूर्वोत्तर के चुनिन्दा इलाकों और अंडमान एवं निकोबार द्वीप (Andaman and Nicobar Island) जैसे स्थानों पर जाकर सेवा करनी ही होगी.

शीर्ष अदालत ने दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) के आदेश के खिलाफ सेना के एक कर्नल की अपील पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की. हाईकोर्ट ने सेना के इस कर्नल और उनकी कर्नल पत्नी से कहा था कि वे 15 दिन के भीतर अपनी तैनाती के नये स्थान पर कार्यभार ग्रहण करें.

याचिकाकर्ता, जो जज एडवोकेट जनरल (जेएजी) विभाग में अधिकारी हैं, ने 15 मई के अपनी तैनाती के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. याचिका में आरोप लगाया गया था कि चूंकि उन्होंने जेएजी और अन्य के खिलाफ कानूनी शिकायत दायर की थी, इसलिए उन्हें और उनकी पत्नी का इतनी दूर स्थानांतरण करने का निर्णय लिया गया है.

इस अधिकारी ने राजस्थान के जोधपुर से अंडमान और निकोबार द्वीप में अपना तबादला किये जाने को चुनौती दी थी और यह दलील दी थी कि उनकी पत्नी को पंजाब के बठिंडा में तैनात किया जा रहा है.न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति इन्दु मल्होत्रा और न्यायमूर्ति इन्दिरा बनर्जी की पीठ से याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता रंजीत कुमार ने कहा कि बठिंडा और अंडमान और निकोबार द्वीप के बीच की दूरी 3,500 किमी से ज्यादा है.

उन्होंने कहा कि दोनों अधिकारियों का साढ़े चार साल का बच्चा है और उन्होंने अपने-अपने स्थानों पर प्रभार संभाल लिया है. कुमार ने पीठ से कहा कि इस स्थानांतरण की वजह से याचिकाकर्ता को स्वैच्छिक अवकाश के लिये आवेदन करना पड़ेगा.

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