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"अबकी बार किसका बिहार?", ये 12 सीटें जिन पर होंगी सबकी नजर
"अबकी बार किसका बिहार?" ये सवाल बीते कई महीनों से बिहार की सियासी फिजाओं और लोगों की जुबान पर तैर रहा है। कल यानी मंगलवार 10 नंवबर को ये इंतजार खत्म हो जाएगा। सुबह 8 बजे से जनता द्वारा ईवीएम में कैद नेताओं की किस्मत के पिटारे खुलने शुरू हो जाएंगे और चढ़ते दिन के साथ ये स्पष्ट हो जाएगा कि इस बार राज्य की जनता ने सत्ता की चाभी "युवराज" को सौंपी है या मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर भरोसा बरकरार रखा है। कोरोना महामारी के बीच राज्य में तीन चरणों में चुनाव संपन्न 7 नवंबर को संपन्न हुए हैं।
इस बार चुनावी मैदान में सीएम की रेस में प्रमुख दावेदार के तौर पर महागठबंधन का चेहरा और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव, एनडीए की तरफ से मौजूदा सीएम नीतीश कुमार और नई नवेली प्लुरल पार्टी की मुखिया और लंदन से पढ़ाई कर लौटने वाली पुष्पम प्रिया चौधरी हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (आरएलएसपी) और मायावती की पार्टी बसपा के साथ 6 दलों ने गठबंधन कर चुनाव लड़ा है और ग्रैंड डेमोक्रेटिक सेक्युलर फ्रंट की तरफ से पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा को सीएम पद का दावेदार बनाया है। जनअधिकार पार्टी के अध्यक्ष पप्पू यादव को प्रगतिशील लोकतांत्रिक गठबंधन ने मुख्यमंत्री पद का दावेदार घोषित कर मैदान में उतारा है। राज्य में एनडीए से अलग होकर 143 सीटों पर दिवंगत नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी चिराग पासवान की अगुवाई में चुनाव लड़ रही है। हालांकि, चिराग ने खुद को सीएम पद के लिए घोषित नहीं कर रखा है।
राज्य की एक दर्जन से अधिक हॉट सीटें, जिस पर टिकेंगी हर किसी की नजर
राघोपुर विधानसभा
वैशाली जिले के राघोपुर विधानसभा से राजद नेता और महागठबंधन की तरफ से सीएम पद के उम्मीदवार तेजस्वी यादव चुनाव लड़ रहे हैं। यह राजद का गढ़ माना जाता रहा है। लेकिन साल 2010 में पूर्व सीएम राबड़ी देवी यहां से चुनाव हार गई थी। लेकिन, 2015 में जब राजद ने एनडीए का साथ छोड़ने वाली पार्टी जेडीयू की अगुवाई में चुनाव लड़ा था और राघोपुर से तेजस्वी यादव को मैदान में उतारा था, वो जीत दर्ज करने में सफल रहे। लालू यादव ने भी यहीं से साल 1995 में चुनाव लड़ा था। क्षेत्र में करीब 3.17 लाख मतदाता हैं। यहां से तेजस्वी को टक्कर देने के लिए भाजपा की तरफ से सतीश कुमार को मैदान में उतारा है। सतीश 2015 में यहां से हार गए थे। इस साल भाजपा और लोजपा ने मिलकर चुनाव लड़ा था। अब देखना होगा कि यहां से तेजस्वी के तेवर कितने असर दिखाते हैं।
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