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गावस्कर, अनुष्का, विराट और फ़ेमिनिज़्म से जुड़े कुछ ज़रूरी सवाल
तीन दिन पहले ट्विटर पर "बायकॉट गावस्कर" ट्रेंड कर रहा था. आज सुबह उठी तो देखा नया हैशटैग चल रहा है - "बायकॉट फ़ेमिनिज़्म." हालांकि ये इतना नहीं चला कि ट्रेंड करने लगे.
सोशल मीडिया पर उड़ती-उड़ती चार-छह पोस्ट दिखीं कि ख़ुदमुख़्तारी के नाम पर आजकल की औरतें किसी भी बात को मुद्दा बनाकर बखेड़ा खड़ा कर देती हैं. तिल का ताड़ बना देती हैं.
तिल या ताड़, समझने के लिए बात को ज़रा शुरू से समझना होगा. चार दिन पीछे चलते हैं.
यूएई में आईपीएल चल रहा है. 24 सितंबर यानि गुरुवार का दिन था. किंग्स इलेवन पंजाब और रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर मैदान में आमने-सामने थे. पंजाब ने पहले बल्ला थामा और धुंआधार रनों की पारी खेली.
दो बार ऐसे मौक़े आए कि अगर विराट कोहली केएल राहुल की आसमान से सीधी-सीधी चली आ रही गेंद को लपक लेते तो न उनकी सेंचुरी बनती, न रॉयल चैलेंजर्स को ऐसी करारी हार का मुंह देखना पड़ता.
विराट के दीवाने इसी उम्मीद में टीवी से मुंह सटाए बैठे थे कि कैच अब लिया कि तब, लेकिन दोनों कैच छूट गए. विराट बैटिंग के लिए उतरे और एक रन बनाकर आउट हो गए.
उसी समय सुनील गावस्कर आकाश चोपड़ा के साथ कमेंट्री कर रहे थे. कमेंट्री के दौरान उन्होंने कहा, "अब जो लॉकडाउन था तो सिर्फ़ अनुष्का की गेंदों की प्रैक्टिस की उन्होंने."
अनुष्का शर्मा का गावस्कर को जवाब
एक अंग्रेज़ी अख़बार ने अपने ट्वीट में उस लाइन को इस तरह लिखा, "इन्होंने लॉकडाउन में तो बस अनुष्का की गेंदों पर प्रैक्टिस की है." बाद में हर जगह यही लाइन कोट की जाती दिखाई दी.
नाविका कुमार "बायकॉट गावस्कर" हैशटैग के साथ मैदान में कूद पड़ीं. बरखा दत्त ने कहा कि मर्दों की हर बकवास का जवाब दिया जाना चाहिए.
दरअसल कोई और जवाब दे, इससे पहले ख़ुद अनुष्का शर्मा गावस्कर को जवाब दे चुकी थीं.
उन्होंने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में लिखा, "ये तो सच है कि आपका कमेंट अच्छा नहीं था, लेकिन मैं जानना चाहूँगी कि आपके दिमाग़ में किसी के ख़राब प्रदर्शन का दोष उसकी पत्नी के सिर मढ़ने का ख़याल कैसे आया. निश्चित ही इतने सालों से आपने हर खिलाड़ी के खेल पर टिप्पणी करते हुए उसके निजी जीवन का सम्मान किया है. आपको नहीं लगता है कि उतना ही सम्मान मुझे और हमें भी मिलना चाहिए. निश्चित ही आपके पास और बहुत से शब्द और वाक्य रहे होंगे मेरे पति के खेल पर टिप्पणी करने के लिए. या आपके शब्द तभी प्रासंगिक होंगे जब उसमें मेरा नाम आए. ये साल 2020 है और अब भी मेरे लिए चीज़ें बदली नहीं हैं. कब आप लोग क्रिकेट में मेरा नाम घसीटना और मुझ पर ज़हर बुझी टिप्पणियां करना बंद करेंगे. आप लीजेंड हैं. मैं आपका बहुत सम्मान करती हूं. मैं बस वो कहना चाहती थी जो आपकी बात सुनकर मुझे महसूस हुआ."
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