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बिहार चुनाव: चिराग पासवान और उपेंद्र कुशवाहा की आख़िरी मुहिम
बिहार में होने वाले विधानसभा के चुनावों में लोक जनशक्ति पार्टी यानी 'एलजेपी' की ख़्वाहिशों की फ़हरिस्त लंबी है, जिसे उसने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सामने रखा है.
इनमें चिराग़ पासवान के लिए उपमुख्यमंत्री की कुर्सी, 33 विधानसभा की सीटें, दो एमएलसी और एक राज्यसभा की सीट शामिल हैं. इससे पहले एलजेपी 42 सीटों की माँग कर रही थी.
सोमवार को बीबीसी से बात करते हुए पार्टी के प्रवक्ता अशरफ़ अली ने कहा कि अगर उनकी पार्टी की माँगों पर 'एनडीए' में सहमति नहीं बनती है तो फिर 'एलजेपी' हर उस सीट पर अपना उम्मीदवार खड़ा करेगी जहां से जनता दल (यूनाइटेड) चुनाव लड़ेगी.
एलजेपी के अध्यक्ष चिराग़ पासवान, भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पहले ही चिठ्ठी लिख कर कह चुके हैं कि "नीतीश कुमार के ख़िलाफ़ 'एंटी इनकम्बेंसी' है और वो चुनाव हार" भी सकते हैं. उन्होंने ये भी सुझाव दिया कि बिहार में भारतीय जनता पार्टी को अकेले ही चुनाव लड़ना चाहिए.
लेकिन इन सबके बावजूद भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष ने स्पष्ट कर दिया कि बिहार में 'एनडीए' नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही चुनाव लड़ेगी.
'भाजपा से शिकायत नहीं, नीतीश की अनदेखी का अफ़सोस'
अभी तक एनडीए में सीटों के बँटवारे को लेकर बातचीत का दौर चल ही रहा है और घटक दलों के बीच आम सहमति की कोशिश की जा रही है.
मगर चिराग पासवान की पार्टी में असंतोष साफ़ झलक रहा है. पार्टी के प्रवक्ता अशरफ़ अली कहते हैं कि ऐसा नहीं है कि चुनाव की घोषणा के बाद ही उनकी पार्टी ने कड़े सवाल उठाए हैं.
अली का कहना है कि बाढ़, विस्थापित मज़दूरों के पलायन और कोरोना महामारी का सही तरह से प्रबंधन नहीं करने को लेकर उनकी तरफ़ से मुख्यमंत्री और मौजूदा राज्य सरकार की आलोचना की जाती रही है.
वो कहते हैं, "हम और हमारे शीर्ष नेता इस बात को एनडीए के अंदर भी उठाते रहे हैं कि घटक दलों की राज्य में अनदेखी हो रही है. सरकार चलाने में न राय ना मशविरा. इसके अलावा जो गठबंधन में सबसे अहम चीज़ है वो है साझा न्यूनतम कार्यक्रम - जो अबतक बन ही नहीं पाया."
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