होम बैंकिंग रेग्युलेशन संशोधन बिल लोकसभा में पास, RBI के अधीन होंगे देश के सभी को-ऑपरेटिव बैंक
बैंकिंग रेग्युलेशन संशोधन बिल लोकसभा में पास, RBI के अधीन होंगे देश के सभी को-ऑपरेटिव बैंक
केंद्र सरकार ने बैंक उपभोक्ताओं (Bank Customers) की मुश्किलों को कम करने और को-ऑपरेटिव बैंकों को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के अधीन लाने के लिए एक संशोधन विधेयक (Amendment Bill) संसद के मानसून सत्र (Monsoon Session) के दौरान लोकसभा में पेश किया. इस विधेयक को आज चर्चा के बाद लोकसभा में पारित कर दिया गया है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (FM Nirmala Sitharaman) ने संसद के निचले सदन में बिल पर चर्चा के दौरान कहा कि केंद्र सरकार बैंकिंग रेग्युलेशन एक्ट, 1949 (Banking Regulation Act, 1949) में संशोधन कर बैंक उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा सुनिश्चित करना चाहती है.
जून में लाए गए अध्यादेश की जगह लेगा संशोधित कानून
बिल पारित होने से पहले वित्त मंत्री ने कहा कि को-ऑपरेटिव बैंक और छोटे बैंकों के डिपॉजिटर्स पिछले दो साल से कई तरह की समस्याओं का सामना कर रहे है. हम इस विधेयक के जरिये उनके हितों की रक्षा सुनिश्चित करेंगे. ये बैंक मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं और एक मोरेटोरियम सुविधा चाहते हैं. इसमें रेग्युलटर का काफी समय खराब होता है. बता दें कि इस विधेयक को पहली बार बजट सत्र के दौरान मार्च में पेश किया गया था. हालांकि, कोविड-19 महामारी के कारण ये पारित नहीं हो सका था. इसके बाद केंद्र सरकार ने जून 2020 में देश के 1,482 अर्बन को-ऑपरेटिव और 58 मल्टी-स्टेट कॉ-आपरेटिव बैंकों को रिजर्व बैंक के अधीन (Under Supervision) लाने के लिए अध्यादेश लागू कर दिया था.
को-ऑपरेटिव बैंकों के नियमन के लिए नहीं है नया कानून
निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया कि ये विधेयक को-ऑपरेटिव बैंकों का नियमन (Regulate) नहीं करता है और ना ही ये केंद्र सरकार के को-ऑपरेटिव बैंकों का अधिग्रहण (Undertake) करने के लिए लाया गया है. संशोधन विधेयक के जरिये आरबीआई किसी बैंक के समामेलन (Amalgamation) की स्कीम बिना मोरेटोरियम के तहत रखे ला सकेगा. इस संशोधन से पहले अगर किसी बैंक को मोरेटोरियम (Moratorium) के तहत रखा जाता था तो डिपॉजिटर्स की निकासी की सीमा (Withdrawl Limit) तय कर दी जाती थी. साथ ही बैंक के कर्ज देने पर रोक लगा दी जाती थी.
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