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भगवान महाकाल ने नगर भ्रमण कर जाना प्रजा का हाल, तीन स्वरूपों में दिये दर्शन
उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान महाकालेश्वर श्रावण के तीसरे सोमवार को नगर भ्रमण पर निकले और अपनी प्रजा का हाल जाना। इस दौरान उन्होंने तीन स्वरूपों में अपने भक्तों को दर्शन दिये। भगवान महाकालेश्वर ने पालकी में सवार होकर मुखारबिंद स्वरूप में और हाथी पर सवार होकर मनमहेश तथा चंद्रमौलेश्वर के स्वरूप में नगर का भ्रमण किया। कोरोना महामारी के चलते परंपराओं का पालन करते हुए सवारी इस बार भी छोटे मार्ग से ही निकाली गई। सवारी मार्ग पर आम श्रद्धालुओं का प्रवेश निषेध रहा। खास बात यह रही कि सवारी मार्ग पर लगे बेरीकेड्स को कनात से ढंका गया, ताकि श्रद्धालुओं को सवारी न दिखे और वे अपने घरों पर ही केबल नेटवर्क या इंटरनेट के माध्यम से ऑनलाइन रहकर दर्शन कर सके।
भगवान महाकालेश्वर की सवारी निकलने से पूर्व अपरान्ह साढ़े तीन बजे सभामंडप में शासकीय पुजारी पं. घनश्याम शर्मा द्वारा पूजन-अर्चन संपन्न कराया गया। सर्वप्रथम भगवान महाकाल का षोडशोपचार से पूजन-अर्चन किया गया। इसके बाद आरती की गई। पूजन में कलेक्टर आशीष सिंह व पुलिस अधीक्षक मनोज सिंह शामिल हुए। इस अवसर पर महंत विनीत गिरीजी महाराज, प्रशासक एसएस रावत मौजूद थे। पूजन के पश्चात पूजन पश्चात बाबा का मुखारविंद पालकी में विराजित किया गया और कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक ने पालकी को कंधा देकर आगे बढ़ाया। पालकी को मुख्य प्रवेश द्वार पर लाने के बाद बाबा को सशस्त्र सलामी दी गई। यहां से सवारी रामघाट के लिए रवाना हुई। सवारी में सबसे आगे तोपची, घुड़सवार दल, सशस्त्र दल, नगर सेना के जवान, पुलिस बैण्ड, पण्डे-पुजारी, चौबदार, पालकी, हाथी पर मनमहेश एवं चंद्रमौलेश्वर विराजित थे।
भगवान महाकाल की सवारी कोरोना वायरस संक्रमण के मद्देनजर परिवर्तित मार्ग से निकाली गई। सवारी बड़े गणेश मंदिर के सामने से होकर रूद्रसागर मार्ग, हरसिद्धि मंदिर के बगल से झालरिया मठ के सामने से होते हुए रामघाट पहुंची। रामघाट पर पहुंचने के पश्चात भगवान महाकालेश्वर का मां शिप्रा के पवित्र जल से विधिवत पूजन-अर्चन किया गया। इसके बाद भगवान का विधि-विधान से पूजन व आरती की गई। इस दौरान महापौर मीना जोनवाल, विधायक महेश परमार, मुरली मोरवाल, जिला पंचायत अध्यक्ष करण कुमारिया एवं अन्य नागरिक भी मौजूद थे।
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