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डगमगाने लगी तिगड़ी सरकार, खामोशी से उद्धव के चरस बो दिए पवार
महाराष्ट्र में शिवसेना के नेतृत्व में कांग्रेस संग एनसीपी की सरकार तो बन चुकी है लेकिन कुछ भी ठीक नही चल रहा है, क्योकि जिस कॉमन मिनिमम प्रोग्राम के तहत सरकार चलाने के बात हई थी क्या उसका पालन किया जा रहा है? यह सवाल बना हुआ है.. इन दिनों मुस्लिम आरक्षण को लेकर महाराष्ट्र में शिवसेना और एनसीपी के बीच टकराव देखने को मिल रहा है. जिसका जिम्मेदार प्रमुख रूप से एनसीपी को समझा जा रहा है, कैसे आइये समझते है.
एनसीपी आज भले ही सरकार में शिवसेना के साथ है लेकिन उसकी अपनी राजनितिक विचारधारा है और वोटर तबका है जिसके तहत वो राजनीती करती है. राज्य में अल्पसंख्यक मामलो के मंत्री नवाब मलिक विधान परिषद में घोषणा की कि सरकार राज्य में 5% मुस्लिम आरक्षण के लिए कानून लाएगी, जिसके बाद से एनसीपी का शिवसेना के साथ टकराव शुरू हो गया.
बताया जा रहा है कि कॉमन मिनिमम प्रोग्रम के तहत मुस्लिम आरक्षण के सन्दर्भ में कोई बात नहीं की गई थी बावजूद इसके भी एनसीपी की तरफ से ऐसी घोषणा कर दी गई, यही वजह है कि खुद मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को सामने आकर यह कहना पड़ा कि सरकार के सामने अभी तक कोई प्रस्ताव नहीं आया है. अब जब खुद मुख्यमंत्री ही इस आरक्षण की खबरों पर विराम लगा रहे है तो प्रश्न उठते है कि फिर एनसीपी का मंसूबा क्या है, क्या वो शिवसेना के लिए प्रॉब्लम बढ़ाने का काम कर रही है.
क्योंकि एनसीपी ये बात अच्छी तरह से जानती है कि मुस्लिम आरक्षण के मुद्दे पर शिवसेना असहज हो जायेगी और इसके लिए पूरी तरह से तैयार नहीं होगी। क्योकि ऐसा करने से न सिर्फ उद्धव ठाकरे पर मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीती करने का आरोप लगेगा बल्कि शिवसेना के कोर वोटर भी उससे नाराज हो सकते है जो हिंदुत्व के विचारधारा लिए शिवसेना से अभी तक जुड़े हुए है.
दरअसल जानकर मानते है कि ऐसा करके एनसीपी शिवसेना पर अपनी धाक बनाये रखेगी और बीजेपी के लिए दरवाजे भी खुले रखेगी। मसलन किसी भी वजह से महाराष्ट्र की सरकार गिरती है तो सरकार बनाने के लिए बीजेपी शिवसेना के बाद अगर किसी विकल्प के बारे में सोचेगी तो वो एनसीपी हो सकती है.
वैसे भी एनसीपी का मुख्यमंत्री महाराष्ट्र में आज तक नहीं बन पाया है. आप ध्यान दीजिये कि हमेशा से ही शरद पवार के रिश्ते नरेंद्र मोदी और बीजेपी आलाकमान से अच्छे रहे है. जो कि शिवसेना भी जानती है. क्या वाकई उसका मंसूबा मुस्लिम आरक्षण देने का है या शिवसेना को असहज करना है, ये सवाल उठने लगे है
दरअसल एनसीपी न तो खुलकर नागरिकता कानून के विरोध में है और ना ही इसके खिलाफ विधानसभा के पटल पर प्रस्ताव लाने में रूचि दिखा रही है, अजित पवार जो कि राज्य के उपमुख्यमंत्री है उनका बयान आया है कि सीएए, एनपीआर और एनआरसी से किसी को भयभीत होने की जरूरत नहीं है साथ ही तीनों कानूनों के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव लाने की जरूरत भी नहीं है.
उनके इस बयान को संदेह की निगाहो से देखा जाने लगा है, क्योकि कही न कही इससे बीजेपी को राहत जरूर मिली होगी। दरअसल मुस्लिम आरक्षण से अधिक चिंताजनक मसला आज मुसलमानो के लिए नागरिकता कानून और एनआरसी का है, मुस्लिम समाज को इस कानून से राहत चाहिए लेकिन एनसीपी की चुप है.
बीजेपी वैसे भी लगातार कोशिश कर रही है कि वो महाराष्ट्र की सरकार को अस्थिर करे, यही वजह है की राज्य के पूर्व मंत्री और बीजेपी नेता सुधीर मुनगंटीवार ने बयान दिया है कि अगर एनसीपी और कांग्रेस उद्धव ठाकरे सरकार से समर्थन वापस ले लेती हैं तो बीजेपी उसे समर्थन दे सकती है। अब ऐसे में मुश्किलें उद्धव ठाकरे के सामने है कि कैसे वे अपनी सरकार बचा पाते है.
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