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प्रादेशिकीउत्तर-प्रदेशविचारकानून Alert Star Digital Team Apr 2, 2026 10:00 PM

तलाक पर इलाहाबाद हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, ऐलान की तारीख से ही माना जाएगा तलाक, मुस्लिम महिलाओं को मिला बड़ा अधिकार

प्रयागराज से एक महत्वपूर्ण न्यायिक फैसले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत तलाक की वैधता को लेकर बड़ा आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि पति द्वारा तलाक का ऐलान जिस दिन किया जाता है, उसी तारीख से तलाक प्रभावी माना जाएगा।

तलाक पर इलाहाबाद हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, ऐलान की तारीख से ही माना जाएगा तलाक, मुस्लिम महिलाओं को मिला बड़ा अधिकार

प्रयागराज से एक महत्वपूर्ण न्यायिक फैसले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत तलाक की वैधता को लेकर बड़ा आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि पति द्वारा तलाक का ऐलान जिस दिन किया जाता है, उसी तारीख से तलाक प्रभावी माना जाएगा। बाद में अदालत का आदेश केवल इसकी पुष्टि करता है, इससे कोई नया तलाक अस्तित्व में नहीं आता। कोर्ट के इस फैसले को मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों के लिहाज से बड़ी राहत माना जा रहा है।

सिंगल बेंच ने सुनवाई के बाद सुनाया अहम फैसला

मामले की सुनवाई जस्टिस मदन पाल सिंह की सिंगल बेंच ने की। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि मोहम्मदिया कानून के अनुसार तलाक की प्रभावी तारीख वही होती है, जिस दिन पति तलाक की घोषणा करता है। अदालत का बाद का आदेश केवल घोषणात्मक प्रकृति का होता है और वह तलाक की पुष्टि करता है, नई तारीख तय नहीं करता।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि डिक्री की तारीख को तकनीकी आधार बनाकर किसी महिला को उसके वैधानिक अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता।

क्या था पूरा मामला

यह मामला हुमायरा रियाज से जुड़ा था, जिन्होंने प्रयागराज के परिवार न्यायालय के उस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी जिसमें दंड प्रक्रिया संहिता (CRPC) की धारा 125 के तहत उनके दूसरे पति से भरण-पोषण की मांग खारिज कर दी गई थी। हालांकि परिवार न्यायालय ने उनके दो नाबालिग बेटों के भरण-पोषण का आदेश दिया था।

फैमिली कोर्ट ने अपने निर्णय में माना था कि पहली शादी कानूनी रूप से तब तक समाप्त नहीं हुई थी जब तक अदालत ने तलाक की डिक्री जारी नहीं की। इसी आधार पर दूसरी शादी को अमान्य माना गया था।

हाईकोर्ट ने बदला कानूनी आधार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने परिवार न्यायालय की इस व्याख्या को गलत ठहराते हुए कहा कि तलाक की मूल तारीख पति द्वारा किए गए ऐलान की ही मानी जाएगी। अदालत की डिक्री केवल उसकी पुष्टि करती है, इसलिए महिला को भरण-पोषण के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।

मुस्लिम महिलाओं के अधिकार हुए मजबूत

इस फैसले के बाद अब मुस्लिम महिलाएं तलाक की घोषणा की तारीख से ही भरण-पोषण की हकदार मानी जाएंगी। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि भविष्य में ऐसे मामलों में फैमिली कोर्ट तलाक के ऐलान की तारीख को ही आधार मानें, न कि कोर्ट की डिक्री की तारीख को।

यह फैसला उन कई मामलों के लिए मिसाल माना जा रहा है, जहां तलाक की प्रभावी तारीख को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं।

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