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अखिलेश को झटका: बदायूं, अलीगढ़ और मिर्जापुर में भाजपा उम्मीदवारों की जीत तय
बदायूं, अलीगढ़ और मिर्जापुर में विधानपरिषद चुनाव के लिए विपक्षियों के नाम वापस लेने या नामांकन निरस्त होने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवारों की निर्विरोध जीत लगभग तय हो गई है। बदायूं में समाजवादी पार्टी (सपा) के उम्मीदवार एवं पूर्व विधायक सिनोद कुमार शाक्य ने अपना नामांकन वापस ले लिया है जिसके बाद भाजपा प्रत्याशी का निर्विरोध निर्वाचन तय हो गया है। जिलाधिकारी दीपा रंजन ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि शाक्य ने आज अपना नामांकन वापस ले लिया, जिसके बाद अब चुनाव मैदान में सिर्फ भाजपा प्रत्याशी वागीश पाठक बचे हैं। उन्होंने बताया कि वागीश को अब निर्वाचित घोषित कर दिया जाएगा और इस आशय की सूचना चुनाव आयोग को दे दी गई है।
उल्लेखनीय है कि बदायूं सपा का गढ़ रहा है। सपा ने प्रदेश विधानपरिषद चुनाव के लिए नामांकन की प्रक्रिया दोबारा शुरू करने की मांग की है। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मंगलवार को ट्वीट किया था कि भाजपा के राज में लोकतंत्र की रक्षा की अपेक्षा करना… दिन में तारे ढूंढना है। ये बाहुबल का घोर निंदनीय रूप है। या तो पर्चा नहीं भरने दिया जाएगा या चुनाव को प्रभावित किया जायेगा या परिणामों को। हार का डर ही जनमत को कुचलता है।
अलीगढ़ में अलीगढ़-हाथरस सीट से एकमात्र प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार सपा के जसवंत सिंह यादव का नामांकन तकनीकी आधार पर निरस्त हो जाने से भाजपा उम्मीदवार ऋषि पाल सिंह के भी निर्विरोध निर्वाचित होने का रास्ता साफ हो गया है। जिलाधिकारी सेल्वा कुमारी जे. ने बताया कि सपा उम्मीदवार जसवंत अपने नामांकन के एक हस्ताक्षरी प्रमोद कुमार को पेश करने में नाकाम रहे। उन्होंने बताया कि जसवंत को आज तक का समय दिया गया था लेकिन वह ऐसा नहीं कर सके, जिसकी वजह से उनका नामांकन खारिज कर दिया गया। हालांकि, सपा उम्मीदवार के वकील का आरोप है कि यादव का नामांकनपत्र फर्जी आधार पर खारिज किया गया है और यह उनके मुवक्किल के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। सपा के जिला अध्यक्ष गिरीश यादव का आरोप है कि यह सबकुछ जानबूझकर किया गया है ताकि सत्तारूढ़ दल के उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित की जा सके।
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