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प्रादेशिकीउत्तर-प्रदेश Alert Star Digital Team Jul 15, 2024 09:20 PM

यूपी उपचुनाव: सपा या भाजपा, किसका पलड़ा अभी भारी? क्यों बीजेपी के सामने बड़ी चुनौती

यूपी उपचुनाव: सपा या भाजपा, किसका पलड़ा अभी भारी? क्यों बीजेपी के सामने बड़ी चुनौती

यूपी उपचुनाव: सपा या भाजपा, किसका पलड़ा अभी भारी? क्यों बीजेपी के सामने बड़ी चुनौती

लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के इंडिया गठबंधन से बुरी तरह हार चुकी भाजपा के पास अगले विधानसभा चुनाव से पहले माहौल बनाने का एक मौका उपचुनाव में आने वाला है। यूपी की दस सीटों पर पर होने वाले उपचुनाव को विधानसभा का सेमीफाइनल भी माना जा रहा है।

उपचुनाव का रिजल्ट यह तय करेगा कि सपा-कांग्रेस को मिली जीत एक तुक्का था या बीजेपी को आगे भी मुश्किलें झेलनी होंगी। शनिवार को ही देश के सात राज्यों में हुए उपचुनाव में भी भाजपा को झटका लगा है। 13 में से दस सीटें इंडिया गठबंधन ने जीती है। बीजेपी सिर्फ दो सीटें जीत सकी है। एक सीट निर्दलीय को मिली है। ऐसे में यूपी के उपचुनाव ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

यूपी में लोकसभा चुनाव में भी बीजेपी को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ था। भाजपा यूपी की 80 में से पिछली बार 62 सीटें जीती थी। इस बार उसे 33 पर ही जीत मिली। सहयोगी रालोद ने दो और अपना दल ने एक सीट जीती। इससे एनडीए 36 सीटें जीत सका। सपा अकेले इससे ज्यादा 37 सीटें जीत गई है। इससे साफ है कि सपा यूपी में बहुत बड़ी चुनौती बन गई है। उपचुनाव में बीजेपी के सामने चुनौती इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि लोकसभा चुनाव के दौरान इन नौ में से पांच सीटों पर सपा को बढ़त मिली है।

भाजपा ने हर सीट पर तीन-तीन मंत्रियों को मैदान में उतार चुकी है। सपा ने निपटने के लिए नए सिरे से तैयारी कर रही है तो दूसरी तरफ सपा एक बार फिर पीडीए के फार्मूले पर काम कर रही है। माना जा रहा है कि जल्द ही उपचुनाव का ऐलान हो जाएगा।

दस में से नौ सीटों पर चुने गए विधायकों के सांसद बनने के कारण चुनाव होने जा रहा है। एक सीट कानपुर की सीसामऊ सपा विधायक इरफान सोलंकी को सजा के कारण रिक्त हुई है। दिलचस्प यह भी है कि जो विधायक अब सांसद बन गए सभी ने अपने विधान सभा में बढ़त हासिल की। केवल फूलपुर सीट से सांसद बने भाजपा के प्रवीण पटेल सपा के वोटों से पिछड़ गए हैं। यानी अपनी विधानसभा सीट पर पिछड़ने के बाद भी वह सांसद बने हैं।

इसी तरह सपा प्रमुख अखिलेश यादव कन्नौज सीट से सांसद बने। उनकी सीट करहल में भी सपा आगे रही। निषाद पार्टी के डा.विनोद कुमार बिंद भदोही लोकसभा सीट से सांसद बने। उनकी विधानसभा सीट मिर्जापुर की मझवां में एनडीए सहयोगी अपना दल आगे रही। अलीगढ़ की खैर और गाजियाबाद में भाजपा, बिजनौर की मीरापुर में रालोद आगे रही।

किस-किस विधायक के इस्तीफे से रिक्त हुईं सीटें
अलीगढ़ की खैर विधान सभा सीट भाजपा के विधायक अनूप प्रधान वाल्मीकि, बिजनौर की मीरापुर सीट भाजपा के सहयोगी रालोद उम्मीदवार चंदन चौहान, प्रयागराज की फूलपुर सीट भाजपा के प्रवीन पटेल, गाजियाबद की सीट भाजपा के अतुल गर्ग, मिर्जापुर की मझवां विधान सभा सीट भाजपा के चुनाव चिन्ह पर लड़े निषाद पार्टी के विनोद बिंद के इस्तीफे की वजह से रिक्त हुईं।

अयोध्या की मिल्कीपुर सीट सपा के अवधेश प्रसाद, अम्बेडकरनगर की कटेहरी सीट सपा के विधायक रहे लालजी वर्मा, संभल की कुंदरकी सीट सपा के जियाउर्रहमान बर्क, मैनपुरी की करहल विधान सभा सीट सपा प्रमुख अखिलेश यादव के लोकसभा चुनाव जीतने के बाद दिये गये इस्तीफे की वजह से रिक्त हुई।

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