होम मुख्तार अंसारी के भाई अफजाल को सपा का टिकट, गाजीपुर में ब्रजेश सिंह से होगा महामुकाबला?

प्रादेशिकीउत्तर-प्रदेश Alert Star Digital Team Feb 19, 2024 10:08 PM

मुख्तार अंसारी के भाई अफजाल को सपा का टिकट, गाजीपुर में ब्रजेश सिंह से होगा महामुकाबला?

मुख्तार अंसारी के भाई अफजाल को सपा का टिकट, गाजीपुर में ब्रजेश सिंह से होगा महामुकाबला?

मुख्तार अंसारी के भाई अफजाल को सपा का टिकट, गाजीपुर में ब्रजेश सिंह से होगा महामुकाबला?

समाजवादी पार्टी ने सोमवार को लोकसभा चुनाव के लिए अपनी दूसरी लिस्ट जारी कर दी। इसमें माफिया मुख्तार अंसारी के भाई अफजाल अंसारी को गाजीपुर से टिकट दिया गया है। अफजाल अंसारी के मैदान में उतरने से यहां महामुकाबला की संभावना बन गई है।

गाजीपुर से ही मुख्तार अंसारी के कट्टर दुश्मन माफिया डॉन ब्रजेश सिंह के मैदान में उतारने की तैयारी सुभासपा कर चुकी है। ओपी राजभर इसका ऐलान कर चुके हैं। ओपी राजभर गाजीपुर की ही जहूराबाद सीट से विधायक भी हैं। माना जा रहा है कि भाजपा भी ब्रजेश सिंह को मैदान में लाना तो चाहती है लेकिन अपना सिंबल नहीं देना चाहती। ओपी राजभर के जरिए ब्रजेश सिंह को उतार कर भाजपा एक तीर से दो निशाने लगा सकती है। सुभासपा के टिकट पर ब्रजेश सिंह को उतारने से राजभर की मुराद पूरी हो जाएगी और अफजाल अंसारी को कड़ी टक्कर देने वाला प्रत्याशी मिल जाएगा।

पिछली बार मोदी लहर में भी भाजपा यह सीट हार गई थी। तब अफजाल अंसारी ने ही तत्कालीन रेल राज्यमंत्री (वर्तमान में जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल) मनोज सिन्हा को हराया था। तब अफजला को बसपा ने टिकट दिया था और गठबंधन के नाते सपा का भी सपोर्ट था। अफजाल को फिर से सांसद बनने से रोकने के लिए भाजपा यहां कोई भी दांव खेल सकती है। इसमें सबसे आसान दांव ब्रजेश सिंह वाला ही हो सकता है।

माफिया मुख्तार अंसारी और माफिया डॉन ब्रजेश सिंह की अदावत किसी से छिपी नहीं है। तीन दशक से दोनों गैंग एक दूसरे का खात्मा करने की कोशिशों के लिए कुख्यात हैं। गाजीपुर में ही दोनों के बीच आमना-सामना हुआ और खूनी संघर्ष के बाद वर्षों से ब्रजेश सिंह गायब भी रहा। दोनों की अदावत का ही नतीजा रहा कि गाजीपुर में ही देश की राजनीति को हिला देने वाला कृष्णानंद राय हत्याकांड हुआ। इसमें विधायक कृष्णानंद राय समेत सात लोगों को गोलियों से भून दिया गयाा था।

ब्रजेश सिंह इससे पहले वाराणसी से एमएलसी बना था। तब भी भाजपा ने अपना सिंबल तो नहीं दिया लेकिन उसके खिलाफ कोई प्रत्याशी भी नहीं उतारा था। ऐसे में सपा से हुए सीधे मुकाबले में ब्रजेश सिंह को आसान जीत मिल गई थी। इस समय भी ब्रजेश सिंह की पत्नी अन्नपूर्णा सिंह वाराणसी से एमएलसी हैं।

गाजीपुर की राजनीति में अफजाल-मुख्तार परिवार का गहरा प्रभाव
तमाम विरोधों और नकेल के बाद भी मुख्तार अंसारी के परिवार पर गाजीपुर और पड़ोसी मऊ जिले की राजनीति पर गहरा प्रभाव है। आज भी मुख्तार के भाई अफजाल गाजीपुर से सांसद हैं तो बेटे मऊ सीट से विधायक है। बड़े भाई का एक बेटा भी गाजीपुर की ही सीट से विधायक है। इससे पहले मुख्तार-अफजाल के पिता सुभानल्लाह अंसारी वर्ष 1977 से लेकर करीब 10 वर्ष तक मुहम्मदाबाद टाउन एरिया के चेयरमैन रहे। यहां की मुहम्मदाबाद सीट से अफजाल अंसारी पांच बार विधायक रहे। दल कोई रहा हो जीत अफजाल की होती रही। पहली बार वह भाकपा के टिकट पर विधानसभा पहुंचे थे।

अफजाल के सांसद बनते ही हुआ था खौफनाक हत्याकांड
अफजाल अंसारी 2004 में सपा के टिकट पर जीतकर पहली बार लोकसभा पहुंचे। इसी के कुछ समय बाद 29 नवंबर 2005 को मुहम्मदाबाद से विधायक बने कृष्णानंद राय समेत सात लोगों की हत्या कर दी गई। अगले चुनवा में सपा से टिकट नहीं मिला तो बसपा से 2009 का चुनाव लड़ा लेकिन हार गए। अगली बार कौमी एकता दल बनाकर बलिया से मैदान में उतरे लेकिन वहां भी हार मिली थी। पिछली बार सपा-बसपा गठबंधन की तरफ से चुनाव लड़े मनोज सिन्हा जैसे कद्दावर नेता को हराकर फिर से सांसद बने। गैंगस्टर के मामले में उन्हें सजा मिलने के बाद सांसद सदस्यता रद्द कर दी गई थी। कुछ समय बाद न्यायालय ने सांसदी बहाल कर दी।

बेनी की पोती श्रेया और जयंत चौधरी की सीट मुजफ्फरनगर से भी उतारा उम्मीदवार
अफजाल के अलावा 11 उम्मीदवारों की दूसरी सूची में बेनी प्रसाद वर्मा की पोती श्रेया वर्मा को गोंडा से टिकट दिया गया है। रालोद प्रमुख जयंत चौधरी की सीट मुफ्फरनगर से हरेंद्र मलिक को टिकट दिया गया है। इससे पूरी तरह से साफ हो गया है कि दोनों की राह जुदा हो गई हैं।

समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस के गठबंधन पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर रखा है। दोनों में सीटों का बंटवारा हुए बिना सपा अब तक 27 उम्मीदवारों की सूची जारी कर चुकी है। पहली सूची में 16 उम्मीदवारों के नाम थे। दूसरी सूची में मुजफ्फरनगर से हरेंद्र मलिक, आंवला से नीरज मौर्य, शाहजहांपुर राजेश कश्यप, हरदोई उषा वर्मा, मिश्रिख रामपाल राजवंशी, मोहनलालगंज आरके चौधरी, प्रतापगढ़, डा. एसपी सिंह पटेल, बहराइच रमेश गौतम, गोंडा श्रेया वर्मा, गाजीपुर अफजल अंसारी और चंदौली से वीरेंद्र सिंह को उम्मीदवार बनाया गया है।

अखिलेश ने उम्मीदवारों के चयन में पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) फार्मूले का पूरा ध्यान रखा है। मोहनलालगंज संसदीय सीट से पूर्व मंत्री आरके चौधरी को उम्मीदवार बनाया गया है। वह पूर्व मंत्री हैं और बसपा के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे चुके हैं। वह एससी हैं। मिश्रिख से पासी बिरादरी के रामपाल राजवंशी को उम्मीदवार बनाया गया है। वह पूर्व विधायक हैं। हरदोई से पासी बिरादरी की ऊषा वर्मा को टिकट दिया गया है। चंदौली से पूर्व मंत्री वीरेंद्र सिंह को उम्मीदवार बनाया गया है। वह क्षत्रिय हैं। बहराइच से पूर्व विधायक रमेश गौतम को उम्मीदवार बनाया गया है। वह मनकापुर सुरक्षित सीट से विधानसभा का चुनाव लड़े थे और हार गए।

Alert Star Digital Team

Alert Star Digital Team

एलर्ट स्टार नाम की पत्रिका और फिर समाचार-पत्र का जन्म हुआ। हमारा प्रयास कि हम निष्पक्ष और निडर पत्रकारिता का वह स्वरूप अपने पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करे। जो लोगो के मन मस्तिष्क में एक भरोसे के रूप में काबिज हो।

Leave A comment

महत्वपूर्ण सूचना -

भारत सरकार की नई आईटी पॉलिसी के तहत किसी भी विषय/ व्यक्ति विशेष, समुदाय, धर्म तथा देश के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी दंडनीय अपराध है। इस प्रकार की टिप्पणी पर कानूनी कार्रवाई (सजा या अर्थदंड अथवा दोनों) का प्रावधान है। अत: इस फोरम में भेजे गए किसी भी टिप्पणी की जिम्मेदारी पूर्णत: लेखक की होगी।

Recent Updates

Most Popular

(Last 14 days)