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इसराइल के क़रीब आ रहे हैं अरब देश, अब फ़लस्तीनियों का क्या होगा?
संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन के इसराइल के साथ समझौता करने को फ़लस्तीनियों ने पीठ में छुरा घोंपने जैसा बताया है.
फ़लस्तीनियों और इसराइल के बीच संघर्ष सात दशक पहले शुरू हुआ था जब 14 मई 1948 को इसराइल एक राष्ट्र बना था. लेकिन ये कहानी इससे पहले ही शुरू हो गई थी.
उस्मानिया सल्तनत के अधीन रहा फ़लस्तीन 1917 में ब्रिटेन के हाथ में आ गया था और ब्रिटेन ने बालफ़ोर घोषणा के तहत फ़लस्तीन में 'यहूदी लोगों के राष्ट्रीय घर' के सिद्धांत को समर्थन दिया था. तब फ़लस्तीन में बहुत कम संख्या में यहूदी रहते थे.
19वीं सदी में यूरोप से यहूदियों ने फ़लस्तीनी ज़मीन के लिए प्रवासन शुरू किया था जो चलता रहा. 1922 में ब्रिटेन ने ट्रांसजोर्डन इलाक़े को फ़लस्तीन मेंडेट से अलग करके यहां यहूदी बस्तियां बसाने पर रोक लगा दी.
आगे चलकर ब्रिटेन ने एक साल में अधिकतम दस हज़ार बाहरी यहूदियों के फ़लस्तीन में बसने की सीमा भी तय की.
स्वतंत्र यहूदी राष्ट्र
1940 के दशक में जब यूरोप में यहूदियों का नरसंहार शुरू हुआ तो फ़लस्तीन की ओर यहूदियों ने बड़े पैमाने पर कूच किया. हथियारबंद यहूदी समूहों ने ब्रिटेन के ख़िलाफ़ संघर्ष का रास्ता अपनाकर स्वतंत्र यहूदी राष्ट्र के निर्माण के लिए लड़ाई भी छेड़ दी.
1947 में संयुक्त राष्ट्र ने फ़लस्तीन को स्वतंत्र यहूदी राष्ट्र और अरब राष्ट्र में बांटने की सिफ़ारिश की और यरूशलम पर अंतरराष्ट्रीय नियंत्रण की सिफ़ारिश की. 1948 में इसराइल ने अपने आप को स्वतंत्र घोषित किया और उसे संयुक्त राष्ट्र में शामिल कर लिया गया.
इसके एक ही साल बाद अरब देशों और इसराइल के बीच युद्ध हुआ. समझौते में इसराइल के पास पहले से अधिक ज़मीन आई. मिस्र ने ग़ज़ा पर क़ब्ज़ा कर लिया. जॉर्डन ने वेस्ट बैंक और पूर्वी यरूशलम को छीन लिया.
इसराइल तो एक राष्ट्र बन गया था लेकिन फ़लस्तीनियों के बुरे दिन शुरू हो गए थे. उस समय फ़लस्तीनी अरब लोगों की आबादी क़रीब 12 लाख थी जिनमें से साढ़े सात लाख को अपना घर छोड़कर भागना पड़ा.
1967 में हुए अरब-इसराइल युद्ध में पूर्वी यरूशलम, वेस्ट बैंक, सीरिया के गोलान हाइट्स और मिस्र के सिनाई इलाक़े पर इसराइल का नियंत्रण हो गया. फ़लस्तीनियों की और अधिक ज़मीन इसराइल के क़ब्ज़े में आ गई.
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