होम विचार कला-साहित्य ऐसे थे हमारे कल्लू भईया!

 

महिला जगत के लिए पैगाम-ए-गज़़ल

September 1, 2015, 11:49 AM

 

लोक सेतिया 'तनहा':- 'ऐग़मे दिल क्या करूं, ऐ बहशते दिल क्या करूं। Ó ये नज़्म आपने सुनी होगी, कभी नहीं भुला सकते। मगर क्या याद है वो तरक्क

 

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मातृभाषा पर एक विचार

September 1, 2015, 11:47 AM

 

विश्व का हर व्यक्ति होगा, जिसके पास ऐसी भाषा है जो या तो उसकी है या तो उसके माता-पिता की है या जिसे उसने जन्म से या जीवन में आगे चलकर अपना लि

 

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